महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण को बढ़ावा देगी सरकार, 2,814 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरीBy IANS Wed, 04 November 2026 03:47 PM

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नई दिल्ली। भारत को महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण में आत्मनिर्भर बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की पूंजीगत सहायता योजना को मंजूरी दी गई।

इस योजना का उद्देश्य देश में लिथियम, निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण की घरेलू क्षमता विकसित करना है। इससे कच्चे खनिजों के प्रसंस्करण से लेकर तैयार सामग्री के निर्माण तक देश के भीतर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा और आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी।

'कैपेक्स सपोर्ट स्कीम टू प्रमोट क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग' नामक यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू होगी। इसके तहत चार महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें लिथियम के दो और निकेल के दो संयंत्र शामिल होंगे।

योजना के तहत पात्र निवेश पर 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी। प्रत्येक लिथियम प्रसंस्करण संयंत्र की न्यूनतम क्षमता 30 हजार मीट्रिक टन (30 KT) और निकेल प्रसंस्करण संयंत्र की न्यूनतम क्षमता 50 हजार मीट्रिक टन (50 KT) निर्धारित की गई है।

सरकारी बयान के अनुसार, एक लिथियम परियोजना के लिए अधिकतम 500 करोड़ रुपये और एक निकेल परियोजना के लिए अधिकतम 900 करोड़ रुपये की पूंजीगत सहायता दी जा सकेगी।

लाभार्थियों का चयन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में आवेदकों की तकनीकी योग्यता का आकलन होगा। इसमें सफल रहने वाले आवेदक ही दूसरे चरण की वित्तीय बोली प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। प्रत्येक खनिज के लिए दो लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। इसमें सबसे कम पूंजीगत सहायता मांगने वाली पात्र बोली को प्राथमिकता दी जाएगी।

सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि एकमुश्त देने के बजाय तीन किस्तों में जारी की जाएगी। इसका भुगतान निर्धारित लक्ष्यों और परियोजना की प्रगति से जुड़े माइलस्टोन हासिल करने के आधार पर होगा।

दरअसल, भारत फिलहाल लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों से तैयार परिष्कृत मध्यवर्ती उत्पादों और उच्च शुद्धता वाली सामग्रियों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। देश में इन खनिजों के प्रसंस्करण और शोधन से जुड़ा बुनियादी ढांचा अभी शुरुआती अवस्था में है।

घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने में कई चुनौतियां हैं। इनमें भारी पूंजी निवेश की जरूरत, उपयुक्त तकनीक की सीमित उपलब्धता और कच्चे खनिजों तक पर्याप्त पहुंच शामिल हैं। इन कारणों से निजी कंपनियों के लिए व्यावसायिक स्तर पर परियोजनाएं शुरू करना मुश्किल होता है।

महत्वपूर्ण खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, ऊर्जा भंडारण प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक औद्योगिक तकनीकों में होता है। ऐसे में इनकी घरेलू प्रसंस्करण क्षमता विकसित करना भारत की ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

सरकार को उम्मीद है कि नई योजना से देश में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, आयात का विकल्प तैयार होगा और महत्वपूर्ण खनिजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में मदद मिलेगी।