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अभिनेत्री और पर्यावरण कार्यकर्ता दिया मिर्जा ने अपने बेटे अव्यान की परवरिश को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि वह बचपन से ही उसे देखभाल, सम्मान, सहानुभूति और दयालुता जैसे मूल्यों को समझाने की कोशिश करती हैं।
‘रहना है तेरे दिल में’ की अभिनेत्री ने कहा कि बच्चों को सहमति (कंसेंट), व्यक्तिगत सीमाओं और दूसरों की भावनाओं को समझने की शिक्षा कम उम्र से ही दी जानी चाहिए।
दिया ने कहा, “हर दिन मैं अपने बेटे को सभी के प्रति देखभाल, सम्मान, सहानुभूति और दयालुता का महत्व सिखाने की कोशिश करती हूं।”
उन्होंने कहा कि बच्चों को सहमति का अर्थ केवल ‘नहीं’ को समझना नहीं, बल्कि सामने वाले की असहजता के संकेतों को पहचानना और उसकी व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करना भी सिखाया जाना चाहिए।
दिया के मुताबिक, बच्चे को यह समझना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के इनकार के बाद उसकी सीमाओं का सम्मान कैसे किया जाए। उन्होंने कहा कि कभी-कभी कोई व्यक्ति सीधे शब्दों में मना नहीं करता, लेकिन उसके व्यवहार या हावभाव से असहजता जाहिर हो सकती है और उसका भी सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह अपने बेटे को यह समझाना चाहती हैं कि सहमति केवल ‘नहीं’ की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि किसी काम के लिए सामने वाले की सहज और स्वेच्छा से दी गई ‘हां’ भी जरूरी है।
दिया ने बच्चों को यह समझाने पर भी जोर दिया कि कोई भी व्यक्ति उन्हें अपना समय, ध्यान, स्नेह या अंतरंगता देने के लिए बाध्य नहीं है। उनके अनुसार, किसी का इनकार अपमान नहीं होता और न ही ऐसी स्थिति में उसे चुनौती देने, बातचीत के जरिए बदलने या व्यक्तिगत रूप से लेने की जरूरत है।
अभिनेत्री ने कहा कि बेटों की परवरिश करने वाले माता-पिता की यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसी सीख और बातचीत आगे चलकर लड़कियों के लिए अधिक सुरक्षित, समान और स्वस्थ समाज बनाने में योगदान दे सकती है।
दिया ने सोशल मीडिया पर एक संदेश वाली तस्वीर भी साझा की, जिसमें कहा गया था, “लड़कियों को नुकसान से बचने के लिए तैयार न करें। ऐसे लड़कों की परवरिश करें जो नुकसान न पहुंचाएं।”
दिया मिर्जा दो बच्चों की मां हैं। उनके बेटे अव्यान आजाद रेखी उनके और कारोबारी वैभव रेखी के बेटे हैं। वहीं समायरा रेखी, वैभव रेखी की पिछली शादी से बेटी हैं। दिया समायरा के साथ भी करीबी रिश्ता साझा करती हैं।